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रामलीला में नारद मोह और वेदवती-रावण संवाद के मंचन ने बांधा समां

रामलीला में नारद मोह और वेदवती-रावण संवाद के मंचन ने बांधा समां

🇮🇳 हिंदी📅 12 Oct 2026✍️ IndiKnow
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नारद मुनि के अहंकार और भगवान विष्णु की लीला का प्रभावशाली मंचन, कलाकारों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
महाराजा अग्रसेन जयंती पर विशेष आयोजन, महंत बालकनाथ सहित अतिथियों ने किया चित्र पर पुष्प अर्पित

IndiKnow, रोहतक। पुरानी आईटीआई मैदान, सर्कुलर रोड पर आयोजित रामलीला महोत्सव एवं दशहरा मेले के दूसरे दिन नारद मोह और वेदवती-रावण संवाद की लीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुंबई से आए कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, आकर्षक वेशभूषा और प्रभावशाली संवादों से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया। नारद मुनि के अहंकार और भगवान विष्णु द्वारा उनके अभिमान को दूर करने की लीला के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि भक्ति और तपस्या का वास्तविक आधार विनम्रता है, अहंकार नहीं। इस दौरान पूरा पंडाल भगवान श्रीराम और हनुमान जी के जयकारों से गूंज उठा।

श्री रामलीला उत्सव कमेटी के मीडिया प्रवक्ता राजीव जैन ने बताया कि दूसरे दिन की रामलीला का शुभारंभ अलवर के सांसद एवं बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महंत बालकनाथ के सान्निध्य में हुआ। समाजसेवी सम्पूर्ण सिंह ने उद्घाटन किया, जबकि समाजसेवी उद्योगपति सुरेन्द्र जैन, गौतम जैन, विकास बंसल, संजय बंसल और विकास बिंदल मुख्य अतिथि रहे। मुख्य संरक्षक राजेश जैन और कमेटी प्रधान सुभाष तायल सहित अतिथियों ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद हनुमान जी की संगीतमय महाआरती की गई।

नारद मुनि के अभिमान को भगवान विष्णु ने किया दूर

मुख्य निर्देशक लीलाधर के निर्देशन में कलाकारों ने नारद मोह की लीला का प्रभावशाली मंचन किया। कथा के अनुसार नारद मुनि की कठोर तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इस सफलता से नारद मुनि को अभिमान हो गया और उन्होंने भगवान शिव, ब्रह्मा तथा विष्णु के समक्ष अपनी विजय का बखान किया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए माया रची और स्वयंवर का आयोजन किया। स्वयंवर में नारद मुनि का उपहास होने पर उन्होंने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। बाद में भगवान की माया समाप्त होने पर नारद मुनि को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय और संवादों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को किया याद

महाराजा अग्रसेन जयंती के उपलक्ष्य में रामलीला मंच पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। महंत बालकनाथ सहित अतिथियों ने महाराजा अग्रसेन के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और संगीतमय महाआरती में भाग लिया। इस दौरान महाराजा अग्रसेन के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। कार्यक्रम में महाराजा अग्रसेन के जीवन और उनके समाज कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित प्रसंग भी प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने एक ईंट और एक रुपये की परंपरा के माध्यम से सामाजिक सहयोग, समानता और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश दिया था। उनके आदर्श आज भी समाज को एकजुटता और परोपकार की प्रेरणा देते हैं।

आकर्षक आतिशबाजी बनी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान आकाश में छोड़ी गई धूमकेतु जैसी आतिशबाजी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। रामलीला कमेटी की ओर से सभी अतिथियों को मोतियों की माला, पटका, शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन सतीश भारद्वाज और विजय गुप्ता बाबा ने किया।

इस अवसर पर शंकरलाल मित्तल, सुशील मंगला, जयभगवान ऐरन, रमेश रोहिल्ला, गुलशन निझावन, अनिल बंसल, दिनेश तायल, विकास कंसल, प्रवीण गुप्ता, प्रेमचंद गर्ग, वरुण सिंगल, मनोज जिंदल, सुरेश तायल, सुरेश बंसल, विजय तायल, विनोद जैन, जयभगवान मंगल, राजीव जैन, सुरेन्द्र बल्ली, रामकुमार पंचाल, अमित गुप्ता, सन्नी निझावन, विकास दलाल, अंकित गर्ग, योगेश अरोड़ा, नरेश शर्मा, राजन गोयल, संदीप गुप्ता, मनीष जैन, अमर अरोड़ा, आयुष गुप्ता, अजेश गुप्ता, संजय गुप्ता, पंकज गर्ग, उमा गोयल, संतोष, आशा गर्ग, बृजबाला, अक्षित गोयल और मीना सिंगल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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