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रामलीला महोत्सव का भव्य आगाज, ब्रह्मा-विष्णु-महेश और भृगु ऋषि की नाटिका ने मोहा मन

रामलीला महोत्सव का भव्य आगाज, ब्रह्मा-विष्णु-महेश और भृगु ऋषि की नाटिका ने मोहा मन

🇮🇳 हिंदी📅 11 Oct 2026✍️ IndiKnow
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पुरानी आईटीआई मैदान में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच हुआ रामलीला का शुभारंभ, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भगवान विष्णु की सहनशीलता और विनम्रता का मंचन बना आकर्षण, पुष्प वर्षा और आतिशबाजी से जगमगाया पंडाल

IndiKnow, रोहतक । श्रीरामलीला उत्सव कमेटी की ओर से सर्कुलर रोड स्थित पुरानी आईटीआई मैदान में आयोजित रामलीला महोत्सव एवं दशहरा मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन ब्रह्मा, विष्णु, महेश और भृगु ऋषि की पौराणिक नाटिका के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से भगवान विष्णु की सहनशीलता, क्षमाशीलता और विनम्रता का संदेश दिया। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, आकर्षक झांकियों और आतिशबाजी के बीच पूरा मैदान भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया।

कमेटी के मीडिया प्रवक्ता राजीव जैन ने बताया कि महामंडलेश्वर स्वामी कपिल पुरी महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह का उद्घाटन पूर्व महापौर मनमोहन गोयल, मुख्य संरक्षक एवं उद्योगपति राजेश जैन, प्राचीन हनुमान मंदिर के प्रधान विजय कुमार टीटू विज, द पार्क क्वीन होटल के निदेशक सरदार हिमांशु, लायंस क्लब के पूर्व प्रधान शैलेष जैन, समाजसेवी सन्नी मिनोचा और कमेटी प्रधान सुभाष तायल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर तथा रिमोट का बटन दबाकर किया। कमेटी पदाधिकारियों ने अतिथियों को मोतियों की माला, पटका, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गणेश वंदना, महाराजा अग्रसेन का भव्य दरबार, भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी, दिव्य महारास, फूलों की होली और अष्टलक्ष्मी आरती विशेष आकर्षण रहे। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। ड्रोन से पंडाल में पुष्प वर्षा की गई, जबकि रंगबिरंगी आतिशबाजी ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। आकाश में छोड़ा गया विशेष रोशनी वाला धूमकेतु भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। भृगु ऋषि की परीक्षा में दिखा भगवान विष्णु का क्षमाशील स्वरूप। रामलीला के मुख्य निर्देशक लीलाधर के निर्देशन में कलाकारों ने भृगु ऋषि द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा लेने की पौराणिक कथा का मंचन किया। नाटिका में दिखाया गया कि ऋषियों के बीच ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सबसे श्रेष्ठ एवं सहनशील देवता को लेकर चर्चा हुई। इसका निर्णय करने के लिए भृगु ऋषि को तीनों देवताओं की परीक्षा लेने भेजा गया। भृगु ऋषि पहले ब्रह्मलोक और फिर कैलाश पहुंचे। इसके बाद वैकुंठ में भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर पैर से प्रहार किया। भगवान विष्णु ने क्रोधित होने के बजाय ऋषि के चरण पकड़कर पूछा कि कहीं उनके पैरों को चोट तो नहीं लगी।

भगवान का यह विनम्र और क्षमाशील व्यवहार देखकर भृगु ऋषि का अहंकार समाप्त हो गया। नाटिका में माता लक्ष्मी की नाराजगी और उनके वैकुंठ छोड़कर पृथ्वी पर जाने के प्रसंग का भी मंचन किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से अहंकार त्यागने, धैर्य रखने और क्षमा के महत्व का संदेश दिया गया। कमेटी के प्रधान सुभाष तायल ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आदर्श जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासी और गणमान्य लोग पहुंचे। मंच संचालन विजय गुप्ता बाबा और सतीश भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर शंकर लाल मित्तल, सुशील मंगला, जयभगवान ऐरन, रमेश रोहिल्ला, गुलशन निझावन, अनिल बंसल, दिनेश तायल, विकास कंसल, प्रवीण गुप्ता, प्रेमचंद गर्ग, वरुण सिंगल, मनोज जिंदल, सुरेश तायल, सुरेश बंसल, विजय तायल, विनोद जैन, सुरेंद्र बल्ली, रामकुमार पांचाल, अमित गुप्ता, सन्नी निझावन, विकास दलाल, अंकित गर्ग, योगेश अरोड़ा, नरेश शर्मा, राजन गोयल, संदीप गुप्ता, मनीष जैन, अमर अरोड़ा, आयुष गुप्ता, संजय गुप्ता, पंकज गर्ग, उमा गोयल, आशा गर्ग, बृजबाला और मीना सिंगल सहित अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

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