रामलीला के तीसरे
दिन मुंबई के कलाकारों ने किया राम जन्म, ताड़का वध और
सुबाहु-मारीच प्रसंग का प्रभावशाली मंचन
फूलों की वर्षा, आकर्षक झांकियों और रंगबिरंगी आतिशबाजी ने बढ़ाई रामलीला महोत्सव की भव्यता
IndiKnow, रोहतक। श्रीरामलीला
उत्सव कमेटी की ओर से सर्कुलर रोड स्थित पुरानी आईटीआई मैदान में आयोजित रामलीला
महोत्सव एवं दशहरा मेले के तीसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म, ताड़का वध और सुबाहु-मारीच प्रसंग का मनमोहक मंचन किया गया। मुंबई से आए
कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और संवादों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान
श्रीराम के जन्म का दृश्य प्रस्तुत होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से
गूंज उठा। इस दौरान गुलाब के फूलों की वर्षा की गई। वहीं, राधा-कृष्ण और राम दरबार की 20 आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का
केंद्र बनी रहीं।
कमेटी के मीडिया
प्रवक्ता राजीव जैन ने बताया कि कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी राघवेंद्र
भारती महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। होली हार्ट अस्पताल के डॉ. अंकुर बत्तरा ने
उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि के रूप में हनुमंत वायर उद्योग के निदेशक सुरेश सेठ व
गगन मोंगिया, पंचरत्ना फास्टनर के प्रबंध निदेशक राकेश आहुजा, पठानिया पब्लिक स्कूल के निदेशक अंशुल पठानिया और एवी फास्टनर के निदेशक सुशील
अरोड़ा उपस्थित रहे। कमेटी के मुख्य संरक्षक एवं उद्योगपति राजेश जैन तथा प्रधान
सुभाष तायल ने अतिथियों के साथ रिबन काटकर और रिमोट का बटन दबाकर रामलीला का
शुभारंभ किया। इसके बाद भगवान श्रीराम की संगीतमय महाआरती की गई।
मुख्य निर्देशक
लीलाधर के निर्देशन में कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया।
मंचन में दिखाया गया कि पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने से परेशान ऋषि-मुनि
और धरती माता भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। भगवान विष्णु उन्हें
आश्वासन देते हैं कि वह राजा दशरथ के घर राम के रूप में अवतार लेकर राक्षसों का
संहार करेंगे। इसके बाद राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाने और
अग्निदेव के प्रकट होकर प्रसाद देने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम
सहित चारों भाइयों के जन्म का प्रसंग देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे।
ताड़का वध और
सुबाहु-मारीच प्रसंग ने बांधा समां
रामलीला में
महर्षि विश्वामित्र के राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर यज्ञ की रक्षा के लिए राम
और लक्ष्मण को साथ ले जाने का प्रसंग भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद भगवान श्रीराम द्वारा ताड़का का वध करने तथा सुबाहु और मारीच से युद्ध का
मंचन हुआ। भगवान राम द्वारा सुबाहु का वध करने और मारीच को बाण से दूर समुद्र की
ओर भेजने के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कलाकारों के अभिनय और संवादों
पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।
आतिशबाजी और आकाश
में छोड़ा गया धूमकेतु बना आकर्षण
महोत्सव के दौरान रंगबिरंगी आतिशबाजी की गई। अतिथियों द्वारा आकाश में छोड़ा गया धूमकेतु भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। रामलीला कमेटी की ओर से सभी अतिथियों को मोतियों की माला, पटका, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन सतीश भारद्वाज और विजय गुप्ता बाबा ने किया। इस अवसर पर शंकर लाल मित्तल, सुशील मंगला, जयभगवान ऐरन, रमेश रोहिल्ला, गुलशन निझावन, अनिल बंसल, दिनेश तायल, विकास कंसल, प्रवीण गुप्ता, प्रेमचंद गर्ग, वरुण सिंगल, मनोज जिंदल, सुरेश तायल, सुरेश बंसल, विजय तायल, विनोद जैन, जयभगवान मंगल, सुरेंद्र बल्ली, रामकुमार पांचाल, अमित गुप्ता, सन्नी निझावन, विकास दलाल, अंकित गर्ग, योगेश अरोड़ा, वरुण शर्मा, नरेश शर्मा, राजन गोयल, संदीप गुप्ता, मनीष जैन, अमर अरोड़ा, आयुष गुप्ता, संजय गुप्ता, पंकज गर्ग, उमा गोयल, संतोष, आशा गर्ग, बृजबाला, अक्षित गोयल और मीना सिंगल सहित बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।
