वन हेल्थ की अवधारणा के तहत पशु, मानव एवं पर्यावरण स्वास्थ्य के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
Indiknow, रोहतक। हरियाणा में पशुपालकों को रेबीज रोग के प्रति जागरूक करने तथा पशु एवं मानव स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गाँव बैंसी के रामलीला ग्राउंड में “रेबीज : रोकथाम, जागरूकता एवं पशु-मानव स्वास्थ्य सुरक्षा” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता एवं विस्तार शिविर आयोजित किया गया। शिविर में क्षेत्र के अनेक पशुपालकों एवं डेयरी किसानों ने भाग लिया तथा विशेषज्ञों से रेबीज की रोकथाम, टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि रेबीज एक गंभीर एवं घातक विषाणुजनित रोग है, जिसकी रोकथाम के लिए समय रहते आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि वे अपने पालतू पशुओं एवं कुत्तों का समय पर टीकाकरण करवाएं तथा संदिग्ध पशु के संपर्क में आने पर तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें। उन्होंने कहा कि पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाना रेबीज नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का आयोजन लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया।
शिविर के सफल
संचालन में पशु जनस्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश
जिंदल का नेतृत्व, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. गौतम का संरक्षण तथा पशु रोग
जांच अधिकारी डॉ. पंकज कुमार का समन्वय विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। हरियाणा कृषि
विश्वविद्यालय से डॉ. मीनाक्षी सांगवान, डॉ. देशवाल एवं डॉ. जगबीर सिंह मलिक भी कार्यक्रम में
उपस्थित रहे।
पशु रोग जांच
अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने पशुपालकों को रेबीज रोग के लक्षण, संक्रमण
के माध्यम और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेबीज संक्रमित
पशुओं, विशेषकर
कुत्तों, बिल्लियों तथा अन्य जंगली जानवरों के काटने या खरोंचने से
फैल सकता है। उन्होंने कहा कि लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज अत्यंत गंभीर रोग बन
जाता है, इसलिए संक्रमण की आशंका होने पर समय पर बचावात्मक कदम उठाना
आवश्यक है।
उन्होंने
पशुपालकों को सलाह दी कि अपने पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण करवाएं और पशुओं के
व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर सावधानी बरतें। उन्होंने बताया कि
यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध या संक्रमित पशु काट ले अथवा खरोंच दे, तो
घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए तथा बिना देरी किए
स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय परामर्श एवं एंटी-रेबीज टीकाकरण करवाना चाहिए।
डॉ. मीनाक्षी सांगवान ने ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव, पशु
एवं पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि
रेबीज जैसे रोगों की रोकथाम के लिए पशुपालकों, पशु चिकित्सकों, स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय
एवं सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
शिविर के दौरान
पशुपालकों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर रेबीज रोग, टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन एवं रोग नियंत्रण से संबंधित
विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में सुरक्षित पशुपालन, रेबीज
नियंत्रण तथा जनस्वास्थ्य संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम
का समापन रेबीज मुक्त समाज के निर्माण, पशुओं के नियमित टीकाकरण तथा पशु एवं मानव स्वास्थ्य
की सुरक्षा के लिए जागरूक एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के संकल्प के साथ हुआ।