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समय पर इलाज से क्लबफुट का हर बच्चा दौड़ सकता है अपने पैरों पर : डॉ रूप सिंह

समय पर इलाज से क्लबफुट का हर बच्चा दौड़ सकता है अपने पैरों पर : डॉ रूप सिंह

🇮🇳 हिंदी📅 04 Jun 2026✍️ Indi Know
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समय पर इलाज से क्लबफुट का हर बच्चा दौड़ सकता है | 1000 से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन - विश्व क्लबफुट दिवस - IndiKnow 24x7

- 1000 से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन
- विश्व क्लबफुट दिवस बच्चों ने काटा केक 

Indiknow, रोहतक । विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के हड्डी रोग विभाग ने क्लबफुट से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए विशेष जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में इलाज करा रहे बच्चों, उनके माता-पिता और क्लबफुट क्लिनिक की पूरी टीम ने भाग लिया। कुलसचिव ओर हड्डी रोग विभाग अध्यक्ष डॉ रूप सिंह के साथ मिलकर बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए केक काटा गया और उन्हें बिस्कुट, चॉकलेट व छोटे-छोटे उपहार वितरित किए गए।  

डॉ उमेश यादव ने बताया कि हड्डी रोग विभाग विभागाध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रूप सिंह के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ. रूप सिंह ने कहा कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर जन्म के तुरंत बाद इलाज शुरू कर दिया जाए और नियमित फॉलोअप किया जाए तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है, बस समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

डॉ. रूप सिंह ने बताया कि क्लबफुट यानी जन्मजात मुड़े हुए पैर, सबसे आम हड्डी व मांसपेशी विकृति है। हर 1000 नवजात में से एक बच्चा इस समस्या के साथ पैदा होता है। इलाज न मिलने पर बच्चा जीवनभर के लिए दिव्यांग हो सकता है और चलने-फिरने में दिक्कत आती है। लेकिन समय पर इलाज और सही देखभाल से 95% बच्चों के पैर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।  

डॉ. रूप सिंह ने कहा कि एक बच्चे का ठीक होना सिर्फ पैर सीधा करना नहीं है, बल्कि उसे आत्मविश्वास देना है। वह स्कूल जा सके, खेल सके, दौड़ सके, यही हमारी सबसे बड़ी जीत है। अभिभावक धैर्य रखें और इलाज बीच में न छोड़ें। डॉ जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि  नवजात के एक या दोनों पैर अंदर की तरफ मुड़े होना ,एड़ी का छोटा दिखना , पैर सामान्य से अलग दिशा में मुड़ा होना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। 

पीजीआईएमएस की क्लबफुट क्लिनिक : 1000 से ज्यादा बच्चों का सफल इलाज  

डॉ जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि पीजीआईएमएस रोहतक में डॉ. रूप सिंह के नेतृत्व में समर्पित क्लबफुट क्लिनिक चलाई जा रही है। यह क्लिनिक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को लगती है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पोंसेटी विधि से इलाज किया जाता है। इसमें क्रमबद्ध प्लास्टर, जरूरत पड़ने पर छोटी शल्य प्रक्रिया, विशेष जूते-ब्रेस, काउंसलिंग और लंबे समय तक फॉलोअप शामिल है।  

क्लिनिक के समन्वयक डॉ. जितेन्द्र वाधवानी ने बताया कि हर क्लिनिक दिवस पर करीब 20 बच्चे प्लास्टर, जांच, ब्रेस और पुनर्वास के लिए आते हैं। यह कार्यक्रम क्योर इंडिया के सहयोग से क्लबफुट इंडिया प्रोग्राम के तहत चल रहा है, जिसमें इलाज, ब्रेस, काउंसलिंग और फॉलोअप पूरी तरह निशुल्क दिया जाता है। अब तक इस क्लिनिक में 1000 से अधिक बच्चों का सफल पंजीकरण और इलाज हो चुका है। हरियाणा ही नहीं, आसपास के राज्यों से भी मरीज यहां रेफर होकर आते हैं।  

अभिभावकों से अपील: देर न करें, तुरंत दिखाएं :  

डॉ. रूप सिंह ने अभिभावकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपील की कि यदि किसी नवजात के पैर अंदर की तरफ मुड़े हुए दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पीजीआईएमएस रोहतक संपर्क करें। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी ही जल्दी और आसानी से पैर सीधे हो जाएंगे। बड़ी सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नियमित प्लास्टर और ब्रेस ही सबसे बड़ा इलाज है। 

समर्पित टीम कर रही सेवा :  

क्लबफुट कार्यक्रम से डॉ. रूप सिंह, डॉ. उमेश यादव, डॉ. जितेन्द्र वाधवानी और डॉ. सुनील कुमार के साथ रेजिडेंट चिकित्सक, प्लास्टर तकनीशियन, काउंसलर और पुनर्वास कार्यकर्ता लगातार जुड़े हैं। यह टीम बच्चों को चलने-फिरने लायक बनाने के लिए दिन-रात सेवा दे रही है।

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