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अप्रैल 2026 का त्यौहार  आगामी महीने में आने वाले व्रतों और त्यौहारों की पूरी सूची देखें

अप्रैल 2026 का त्यौहार आगामी महीने में आने वाले व्रतों और त्यौहारों की पूरी सूची देखें

🇮🇳 हिंदी📅 01 Apr 2026✍️ IndiKnow
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अप्रैल 2026 का त्यौहार आगामी महीने में आने वाले | अप्रैल 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह से भरपूर - IndiKnow 24x7

Indiknow डेस्क। अप्रैल 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह से भरपूर रहने वाला है. इस महीने में न केवल मौसम बदलता है, बल्कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास समाप्त होकर पवित्र वैशाख मास की शुरुआत होती है. महीने की शुरुआत में हनुमान जयंती की शक्ति, और मध्य में बैसाखी तथा अक्षय तृतीया जैसे पर्वों की रौनक देखने को मिलेगी. चाहे दान-पुण्य की महिमा हो या फसलों का उत्सव, यह महीना हर श्रद्धालु के लिए बेहद खास है. 

अप्रैल 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार

2 अप्रैल 2026, गुरुवार: हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत

03 अप्रैल 2026, शुक्रवार: वैशाख माह का आरंभ

05 अप्रैल 2026, रविवार: विकट संकष्टी चतुर्थी

09 अप्रैल 2026, गुरुवार: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

10 अप्रैल 2026, शुक्रवार: कालाष्टमी

13 अप्रैल 2026, सोमवार: वरुथिनी एकादशी और वल्लभाचार्य जयंती

14 अप्रैल 2026, मंगलवार: मेष संक्रांति, कृष्ण वामन द्वादशी, वैसाखी और सोलर नववर्ष

15 अप्रैल 2026, बुधवार: कुब्जिका जयंती, विषु कानी, मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत (बुध)

17 अप्रैल 2026, शुक्रवार: वैशाख अमावस्या

18 अप्रैल 2026, शनिवार: पराशर ऋषि जयंती और चंद्र दर्शन

19 अप्रैल 2026, रविवार: अक्षय तृतीया, मासिक कार्तिगाई, परशुराम जयंती और त्रेता युग दिवस

20 अप्रैल 2026, सोमवार: मातङ्गी जयन्ती, रोहिणी व्रत और संकर्षण चतुर्थी

21 अप्रैल 2026, मंगलवार: शंकराचार्य जयंती और सूरदास जयंती

22 अप्रैल 2026, बुधवार: रामानुज जयंती और संकंद षष्ठी

23 अप्रैल 2026, गुरुवार: गंगा सप्तमी

24 अप्रैल 2026, शुक्रवार: बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी

25 अप्रैल 2026, शनिवार: सीता नवमी

27 अप्रैल 2026, सोमवार: मोहिनी एकादशी, सिद्धिलक्ष्मी जयंती और त्रिशूर पूरम

28 अप्रैल 2026, मंगलवार: प्रदोष व्रत (भौम) और परशुराम द्वादशी

30 अप्रैल 2026, गुरुवार: नृसिंह जयन्ती और छिन्नमस्ता जयन्ती

अप्रैल में पड़ने वाले ग्रहण और गोचर

मंगल का धनु राशि में गोचर: मंगल महाराज 02 अप्रैल 2026 की दोपहर 15:27 बजे शनि देव के प्रभाव वाली कुंभ राशि से निकल कर अपने मित्र बृहस्पति के आधिपत्य वाली मीन राशि में गोचर करने जा रहे हैं।  ये यहां पर 11 मई 2026 की दोपहर 12:50 बजे तक विराजमान रहेंगे।

बुध का मीन राशि में गोचर: बुध ग्रह शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को रात्रि 00:57 मिनट पर अपने मित्र ग्रह शनि की कुम्भ राशि से निकलकर देवगुरु बृहस्पति के आधिपत्य वाली मीन राशि में प्रवेश करेंगे।

सूर्य का मेष राशि में गोचर: यह गोचर 14 अप्रैल, सोमवार को प्रातः 9 बजकर 9 मिनट पर होगा। इस विशेष क्षण पर सूर्य देव अपने परम मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

शुक्र का वृषभ राशि में गोचर: 19 अप्रैल 2026, रविवार को दोपहर 15:28 बजे शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ में प्रवेश करेंगे।

 बुध का मेष राशि में गोचर: ग्रहों के राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह 30 अप्रैल 2026 की सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में गोचर करने जा रहे हैं।

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का खास महत्व है। चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा तिथि के दिन बजरंगबली का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से भक्तों को शुभ फल प्राप्त होता है। साथ ही, जीवन से भय दूर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

चैत्र पूर्णिमा

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर चैत्र पूर्णिमा आती है, जो इस 2 अप्रैल, गुरुवार के दिन है। कहा जाता है की इस दिन व्रत करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं और साथ ही भगवान की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा की पूजा करने का विधान होता है।

वरुथिनी एकादशी

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है जो इस बार 13 अप्रैल, सोमवार को पड़ रही है। पद्म पुराण में इस एकादशी तिथि का खास महत्व बताया गया है। मान्यता है की इसका व्रत करने से पापों को नाश होता है। साथ ही, अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।

बैसाखी

इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। बैसाखी त्योहार इस बार 14 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा जो किसानों के लिए बहुत खास पर्व है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए भगवान का शुक्रिया करते हैं। बैसाखी के दिन घर को साफ करके सजाया जाता है और कई प्रकार के पकवान बनाने की भी इस दिन परंपरा होती है।

बुध प्रदोष व्रत

बुधवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने से उसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसलिए 15 अप्रैल, बुधवार को प्रदोष व्रत पड़ने से इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और व्रत किया जाता है। साथ ही, प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा करने का अधिक महत्व होता है।

परशुराम जयंती

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 19 अप्रैल, रविवार के दिन पड़ रही है। माना जाता है की विष्णुजी के छठे अवतार परशुराम जी का प्राकट्य प्रदोष काल में हुआ था। उनका यह अवतार पृथ्वी पर पापी राजाओं के लिए संहार करने के लिए था।

अक्षय तृतीया

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 19 अप्रैल, रविवार के दिन पड़ रहा है। शास्त्रों में इसे युगादि तिथि यानी नए युग की शुरुआत का दिन बताया गया है। इस दिन किसी भी मुहूर्त सोना, संपत्ति आदि खरीदना शुभ माना जाता है।

गंगा सप्तमी

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा सप्तमी का त्योहार पड़ता है। इस बार गंगा सप्तमी 23 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी। मान्यता है की इसी दिन मां गंगा का धरती पर प्राकट्य हुआ था। ऐसे में इस दिन गंगा नदी में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है।

बगलामुखी जयंती

दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या बगलामुखी देवी को माना गया है। इस बार 24 अप्रैल, शुक्रवार को बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी। देवी का यह स्वरूप तंत्र व स्तंभन शक्ति के रूप में जाना जाता है। मान्यता है की वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। देवी के इस रूप की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है।

सीता नवमी

हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी पड़ती है। इस बार 25 अप्रैल, शनिवार के दिन यह पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है की इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में देवी की पूजा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

मोहिनी एकादशी

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 27 अप्रैल, सोमवार के दिन मोहिनी एकादशी पड़ रही है। मान्यता है की इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विष्णुजी की कृपा प्राप्त हो सकती है।

भौम प्रदोष व्रत

हर महीने में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़े तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो इस बार 28 अप्रैल, मंगलवार के दिन पड़ रहा है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ हनुमानजी की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

नृसिंह जयंती

वैशाख मास के शुक्ल चतुर्दशी तिथि पर नृसिंह जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता है की इस दिन भक्त प्रहलाद की प्रार्थना और हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए विष्णुजी के चौथे अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्य हुआ था। इस साल नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन नृसिंह भगवान की पूजा करने और रात्रि में जागरण करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

- बगलामुखी महाधाम 

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