IndiKnow 24x7 ताज़ा हिंदी समाचार · हर क्षण
कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि

कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि

🇮🇳 हिंदी📅 16 Mar 2026✍️ IndiKnow
WhatsApp Telegram X / Twitter
कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि | 17 मार्च 2026 मंगलवार को मासिक शिवरात्रि है हर मासिक - IndiKnow 24x7

17 मार्च 2026 मंगलवार को मासिक शिवरात्रि है

 हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी

1) ॐ शिवाय नम:

2) ॐ सर्वात्मने नम: 

3) ॐ त्रिनेत्राय नम:

4) ॐ हराय नम:

5) ॐ इन्द्र्मुखाय नम:

6) ॐ श्रीकंठाय नम:

7) ॐ सद्योजाताय नम:

8) ॐ वामदेवाय नम: 

9) ॐ अघोरह्र्द्याय नम: 

10) ॐ तत्पुरुषाय नम:

11) ॐ ईशानाय नम:

12) ॐ अनंतधर्माय नम:

13) ॐ ज्ञानभूताय नम:

14)  ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:

15) ॐ प्रधानाय नम: 

16) ॐ व्योमात्मने नम: 

17) ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:

आर्थिक परेशानी से बचने हेतु 

 हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें । और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।  तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी। प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है


सोम प्रदोष व्रत आज 

‌हिंदू पंचांग के अनुसार लगभग हर महीने में कई व्रत और त्योहार आते हैं। कुछ व्रत शांत तरीके से निकल जाते हैं, जबकि कुछ का धार्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। प्रदोष व्रत भी ऐसा ही एक व्रत है, जो भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। आमतौर पर प्रदोष व्रत एक चंद्र मास में दो बार आता है। एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में, दोनों ही त्रयोदशी तिथि को। हालांकि कभी-कभी चंद्रमा की गति के कारण पंचांग में थोड़ा बदलाव हो जाता है। मार्च 2026 ऐसा ही महीना है, जब इस महीने में प्रदोष व्रत तीन बार पड़ रहा है। इसी कारण यह महीना शिव भक्तों के लिए खास माना जा रहा है।

मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार मार्च 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत सोमवार, 16 मार्च को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि के समय के आधार पर ही व्रत का दिन तय होता है।

त्रयोदशी तिथि का समय

शुरू: 16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से

समाप्त: 17 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक

क्योंकि प्रदोष काल की संध्या 16 मार्च को इस तिथि के भीतर पड़ रही है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाएगा। चूंकि यह तिथि सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोमवार का दिन पहले से ही भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत को बहुत शुभ माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय

दिन में कुछ समय ऐसे होते हैं जिन्हें पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 10 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक

सुबह का शुभ समय: सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक

प्रदोष काल पूजा समय: शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 44 मिनट तक

अधिकतर भक्त शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस समय दीपक जलाकर, मंत्रों का जाप करके और भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है।

प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। सनातन धर्म के ग्रंथों में प्रदोष काल को शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक समय बताया गया है। इस व्रत से जुड़ी कुछ प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं।

इस व्रत से दांपत्य जीवन में सुख और शांति आती है

भक्त परिवार और संतान के लिए आशीर्वाद की कामना करते हैं

प्रदोष काल में पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है

शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है

कई भक्तों के लिए यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति भक्ति और आत्मचिंतन का अवसर भी होता है।


प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा सामान्य और भक्तिभाव से की जाती है। व्रत रखने वाले भक्त नीचे बताए गए आसान चरणों का पालन कर सकते हैं:

सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और भगवान शिव के सामने व्रत रखने का संकल्प लें

घर के मंदिर को साफ करें और शाम की पूजा के लिए तैयारी करें

दोष काल में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और कच्चा गाय का दूध अर्पित करें

ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा पढ़ें या प्रदोष व्रत कथा सुनें

घी का दीपक जलाकर आरती करें और पूजा में हुई किसी गलती के लिए क्षमा मांगें

कई भक्त अपनी क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं 

भगवान शिव के भक्तों के लिए सोम प्रदोष व्रत का पालन करना आशीर्वाद प्राप्त करने, व्रत के माध्यम से अनुशासन का अभ्यास करने और भक्ति में समय बिताने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।


-बगलामुखी महाधाम 

More from 24x7

← मुख्य पृष्ठ पर वापस जाएं / Back to IndiKnow