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44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (एनजेएकॉन 2026) सम्मेलन का आयोजन : डाॅ. रूपसिंह

44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (एनजेएकॉन 2026) सम्मेलन का आयोजन : डाॅ. रूपसिंह

🇮🇳 हिंदी📅 14 Feb 2026✍️ IndiKnow
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44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (एनजेएकॉन | पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के - IndiKnow 24x7

Indiknow, रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सुश्रुत ऑडिटोरियम में हड्डी रोग विभाग द्वारा आयोजित करवाए जा रहे तीन दिवसीय 44वें नॉर्थ जोन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (एनजेएकॉन 2026) का शुभारंभ हो गया है। यह सम्मेलन रोहतक में 11 साल बाद आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन दो जगह-6 वर्कशॉप का आयोजन किया गयां। इस सम्मेलन का विषय एक्सप्रेस, एजुकेट, एवॉल्व रखा गया है, जिसका उद्देश्य आर्थोपेडिक क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और अनुसंधानों को साझा करना है। यह कहना है पीजीआई के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. रूपसिंह का। वें शुक्रवार को सुश्रुत सभागार में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।  इस अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए डाॅ. रूप सिंह ने कहा कि सम्मेलन के पहले दिन शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को विभिन्न वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिनमें कैडेवरिक और सॉ बोन वर्कशॉप शामिल हैं। इन वर्कशॉप में एडवांस्ड नी आर्थ्रोस्कोपी, रिवीजन नी आर्थ्रोप्लास्टी, पेल्वी-एसिटेबुलर ट्रॉमा, हाई टिबियल ओस्टियोटॉमी और स्पाइन फिक्सेशन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। डाॅ. आशीष देवगन ने बताया कि सम्मेलन में आर्थोपेडिक सर्जरी के नवीनतम उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्पाइनल सर्जरी और नी आर्थ्रोप्लास्टी पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में 500 प्रतिभागी देश विदेश के आर्थोपेडिक विशेषज्ञ और चिकित्सा विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। डाॅ. आशीष देवगन ने कहा कि सुश्रुत आडिटोरियम में आयोजित इस वैज्ञानिक कार्यक्रम में विभिन्न हॉल्स में अलग-अलग वर्कशॉप आयोजित की गईं, जिनमें प्रैक्टिकल अनुभव और केस स्टडीज पर जोर दिया गया। सम्मेलन 13 से 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें आर्थोपेडिक क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हड्डी रोग विभाग के प्रो. डाॅ. उमेश यादव ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. रूप सिंह ने किया, जिन्होंने स्वागत भाषण दिया और पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए, जिनमें विफलता के कारणों की पहचान, रेडियोलॉजिकल मूल्यांकन, और हड्डी के नुकसान का प्रबंधन शामिल था। डाॅ. उमेश यादव ने बताया कि कार्यशाला के अंत में प्रमाणपत्र वितरण और फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में इस तरह के आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया। डाॅ. उमेश ने कहा कि कार्यशाला के दौरान दो हैंड्स-ऑन सॉ-बोन मॉड्यूल भी आयोजित किए गए, जिसमें सर्जनों ने प्रत्यारोपण हटाने और जॉइंट लाइन पुनर्स्थापन जैसी तकनीकों का अभ्यास किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय कुमार, डॉ. निखिल गर्ग, डॉ. अमित भुटानी, डॉ. तरुण गोयल, और डॉ. अनिल कपूर जैसे प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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